Essay On Sarojini Naidu In Marathi

Essay On Sarojini Naidu In Marathi-87
12 साल की उम्र में सरोजनी जी ने मद्रास यूनिवर्सिटी में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था, जिससे उनकी बहुत वाहवाही और नाम हुआ.

12 साल की उम्र में सरोजनी जी ने मद्रास यूनिवर्सिटी में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था, जिससे उनकी बहुत वाहवाही और नाम हुआ.

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“People outside have been saying that India did not give equal rights to her women.

Now we can say that when the Indian people themselves framed their Constitution they have given rights to women equal with every other citizen of the country.”.

वे देश के अलग अलग प्रदेश, शहर, गाँव में जाती और औरतों को समझाती थी.1925 में सरोजनी जी कानपूर से इंडियन नेशनल कांग्रेस की अध्यक्ष बनने के लिए खड़ी हुई और जीत कर पहली महिला अध्यक्ष बन गई.

1928 में सरोजनी जी USA से आई और गांधीजी के अहिंसावादी बातों को माना और उसे लोगों तक पहुँचाया.

सरोजनी जी हम सब भारतीयों के लिए एक सम्मान का प्रतीक है, भारतीय महिलाओं के लिए वे एक आदर्श है, उनके जन्म दिन को महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है.सरोजनी जी का जन्म एक बंगाली परिवार में हुआ था, उनके पिता वैज्ञानिक व डॉक्टर थे, जो हैदराबाद में रहने लगे थे, जहाँ वे हैदराबाद कॉलेज के एडमिन थे, साथ ही वे इंडियन नेशनल कांग्रेस हैदराबाद के पहले सदस्य भी बने.

उन्होंने अपनी नौकरी को छोड़ दिया और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े.

उनके 4 बच्चे हुए, जिसमें उनकी बेटी पद्मजा सरोजनी जी की तरह कवित्री बनी और साथ ही राजनीती में उतरी और 1961 में पश्चिम बंगाल की गवर्नर बनी.सरोजनी जी ने शादी के बाद भी अपना काम जारी रखा, वे बहुत सुंदर सुंदर कविता लिखा करती थी, जिसे लोग गाने के रूप में गाते थे.

1905 में उनकी कविता बुल बुले हिन्द प्रकाशित हुई, जिसके बाद उन्हें सब जानने पहचानने लगे.

1942 में गाँधीजी के भारत छोड़ो आन्दोलन में उनकी मुख्य भूमिका थी, उन्हें गांधीजी के साथ 21 महीनों तक जेल में भी डाला गया.1947 में देश की आजादी के बाद सरोजनी जी को उत्तर प्रदेश का गवर्नर बनाया गया, वे पहली महिला गवर्नर थी .

2 मार्च 1949 को ऑफिस में काम करते हुए उन्हें हार्टअटैक आया और वे चल बसी.

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